मोहब्बत टुकड़े-टुकड़े. दिल्ली से मेरठ से लेकर जयपुर तक यही हुआ. जिसके साथ जीने मरने की कसमें खाई. रात की नींदे उड़ाई. जिसके लिए घर-समाज से लड़ा. उसी से ना जाने क्यों ऐसी नफरत हुई कि रास्ते से हटाने के लिए गुनाह से भी परहेज नहीं की. ऐसा खूनी खेल खेला कि हर कोई सन्न रह जाए.
